भगवान बुद्ध
का जघन्य अपमान करने वाली 'बुद्धा' सीरियल बंद होनी ही चाहिए
'बुद्धा' सीरिअल का निर्माता, बी के मोदी यह एक
इंडस्ट्रीयालिस्ट है और कई मोदी नामक कंपनियों का मालक है साथ ही स्पाइस ग्रुप का भी मालिक है.
स्पाइस ग्रुप यह कंपनी 'स्पाइस' नामके मोबाइल बनाती है. मोदी झेरोक्स नामकी इसकी कंपनी ने करोडो का
घोटाला किया है (संदर्भ: http://www.slideshare.net/divinvarghese/xerox-corporation-fraud-case-982933). इसकी मोदी रबर नामक कम्पनी ने ५ करोड़ के लोन के लिए बैंक को
फ़साने के कारण दिल्ली के हाई कोर्ट ने उसका दिल्ली का बंगला जप्त करने आदेश दिए थे
(संदर्भ: http://articles.economictimes.indiatimes.com/2012-05-29/news/31887817_1_bk-modi-modi-rubber-vk-modi). बी के मोदी इसने कही से डॉक्टरेट की पदवी प्राप्त कर नाम के आगे डॉ लगवा लिया
है. मोदी यह विश्व हिंदू परिषद का प्रमुख नेता है उसी प्रकार महाबोधी सोसायटी का अध्यक्ष भी है. यह महाबोधी सोसायटी का माजी अध्यक्ष भारत के तमाम
आंबेडकरवादी बौद्धोको एवं नव-बौद्धों
को 'बौद्ध' नहीं
मानता है. (संदर्भ: 'ए मेटर ऑफ इक़्विटी', लेखक- जॉन दयाल). इंटरनेट पर
काफी जानकारी उपलब्ध है. इससे यह ध्यान में आता है कि १८९५
वर्ष में महान बौद्ध धम्म प्रचारक 'अनागरिक धम्मपाल' इन्होने स्थापित की हुई
महाबोधी सोसाइटी पर आज आर आर एस का पूरा कब्ज़ा है. इसलिए आज बहुत से जगहों पर
महाबोधी सोसाइटी पर बंदी लगाने की मांग भारत के बौद्ध करने लगे है.
भगवान बुद्ध का इतिहास ख़राब करने का काम ब्राह्मणों ने सीधे
बुद्ध काल से ही शुरू किया था, वह आजतक शुरू है. यह क्रांति प्रतिक्रांति का भाग
है. ब्राह्मण कभी भी आगे नहीं होता है. बुद्ध को बदनाम करने के लिए ब्राह्मणों ने उसके
काल में ही भिन्न भिन्न युक्तियां कर भिन्न लोगों को आगे किया था. प्राचीन काल में
प्रचार माध्यम शिल्प होते थे. ब्राह्मणों ने बुद्ध के शिल्प को तोडा इस विद्रूप कर
देवी देवता में रूपांतर किया. बुद्ध के साहित्य में मिलावट कर विकृत किया. उसमे
भिन्न चमत्कारिक बाते घुसेड कर बुद्ध के मूल वैज्ञानिक सिद्धांत पर ही ताला लगा
दिया. चौथे पांचवे दशक में जातक कथाये लिख कर पुनर्जन्म का झूठ खड़ा किया. इन जातक
कथाओ पर ही आधारित रामायण लिखा गया. नववी दसवी सदी में विष्णु पुराण आदि के माध्यम
से बुद्ध को सीधा बिष्णु का अवतार बना दिया. महाभारत तो उसके बाद की रचना है. ब्राह्मणों
ने उस उस काल के प्रचार माध्यम का उपयोग कर बुद्ध इतिहास को ब्राह्मण वर्चस्व तले
लाने का भरकस और सफल प्रयत्न किया है. उस समय के बौद्धोने शायद इन बदमाशियों की
तरफ ख्याल नहीं दिया. आज के वर्तमान प्रचार तंत्र द्रुकमाध्यम (visual Media) टीवी और सिनेमा है. इन तंत्रों का उपयोग
कर बुद्ध को ख़त्म करने का प्रयास ब्राह्मण पडदे के पीछे से करता है. इसलिए इन लोगो
ने आज 'बुद्धा' नाम की सीरियल बनाई है. वह हर रविवार को 'झी टीवी' पर सुबह ११ बजे
दिखाई जाती है.
२००३-०४ साल के दरमियान शेखर कपूर ने भी 'महाबोधी सोसाइटी' के
ब्राह्मण वर्चस्व के अधीन होने वाले 'बी के मोदी' का इस्तेमाल कर बुद्ध पर सीरियल
बनाई थी, जिसका प्रसारण लोगों ने रुकवा दिया था. शायद उस समय विष्णु के नववे अवतार
को और ब्राह्मणी वर्चस्व को जोरदार बताया गया होगा. इसलिए अभी ब्राहमणों ने उस
सीरियल में थोडा बदलाव कर ०८-०९-२०१३ से शुरू की गई बुद्ध सीरियल में विष्णु का
अवतार न बताकर राम के नक्षत्र में ही बुद्ध का नाम होने की बात कही गई है. ब्राह्मणी
वर्चस्व पुरे बुद्ध इतिहास पर दिखाई
देता है. इस सीरियल का डिरेक्टर 'आशुतोष गोवारकर' नामक ब्राहमण है. इसने २०१० में
बुद्ध पर पिक्चर बनाने का घोषित किया था. लेकिन ब्लिस ने जब उसे उसकी ब्राह्मणी पहचान
खुली करके उनकी बदमाशियों की गिनती पत्र लिखकर करवा दी, तो उसने सिनेमा बनाने के
ख्वाब को तिलांजलि दे दी. वास्तव में
दिघनिकाय के परिच्छेदों से ध्यान में आता है कि कपिलवस्तु यह नगरी कपिल नामक
नास्तिक मुनी में नाम पर थी और वहाँ के लोग वैदिक धर्म और ब्राह्मणों के विरोधी
थे. इसलिए बुद्धा के घर में ब्राह्मणों का अस्तित्व दिखाना ब्राह्मणी षड्यंत्र है.
सिरिअल को सफल कराने के
उद्देश से फिल्म इंडस्ट्री के विश्व स्तर के बड़े बड़े लोगों को निर्माण कार्य में
शामिल करवा लिया. विश्व स्तर पर नामांकित महाबोधी सोसाइटी के माजी अध्यक्ष बी के
मोदी को शामिल किया. बी के मोदी विश्व
हिन्दू परिषद् का नेता होने की बात पहले ही बताई जा चुकी है. सीरियल के चित्रीकरण
के लिए 'इंदिपेन्डेंस डे', 'दी जाकेल', 'स्टारगेट' जैसे हॉलीवूड सिनेमाओ का चित्रीकरण करने वाले सिनेमातोग्राफेर 'कार्ल वाल्तर लेदेन्लाब' को शामिल किया गया. सिनेमा का कथानक ऑस्कर विजेता 'डेविड वार्ड' ने लिखा है, वेशभूषा- एप्रिल फेरी (युएसए), डेविड
रुसेल (ऑस्ट्रेलिया)- कथा कलाकार, और ऐसे अनेक विश्व स्तर की मंडली की रेलचेल बुद्ध को ब्राह्मण वर्चस्व के नीचे लाने के इस्तेमाल की
गई है. कुल ६०० करोड़ की लगत का बजेट रखकर
बुद्ध को ख़त्म करने का षड्यंत्र रचा गया है.
इस सीरिअल के पहले एपिसोड में ही बुद्ध का जन्म होगा ऐसा एक ब्राह्मण भविष्यवाणी
करता है, बुद्ध का जन्म उसी नक्षत्र में होगा जिस नक्षत्रमें रामका जन्म हुआ था ऐसा
वह बताता है. अन्य सभी ब्राह्मणी बाते तो है ही, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण
बात यह है की आजतक के बुद्ध के इतिहास में बुद्धका सबसे बड़ा अपमान इस
सीरिअल में किया गया है. वह है बुद्धका जन्म 'पुत्र
कामेष्टी यज्ञसे' होना
दिखाया गया है. 'पुत्र कामेष्टी यज्ञ' वह प्रकार है जिसके अनुसार रामका जन्म हुआ है ऐसा
रामायण में लिखा है. बाबासाहेब ने 'रिडल्स ऑफ हिंदुझम' में लिखा है की दशरथ नपुसंक होने को वजह
से ब्राह्मणों के साथ समागम में से राम, लक्ष्मण वगैरे का जन्म हुआ है. 'पुत्र कामेष्टी यज्ञ' का सही प्रकार अमिताभ बच्चन की 'एकलव्य' इस सिनेमा में दिखाया गया है. ऐसे गंदे प्रकार से बुद्ध का भी जन्म होते दिखाना यह बुद्ध का सबसे बड़ा अपमान है.
अंततः ब्राहमन यह बुद्ध का बाप होने की वजह से ही बुद्ध ज्ञानी है ऐसा इतिहास ब्राह्मण को भविष्य के लिए रचकर रखना है. जिसप्रकार आज लोग किसी संदर्भ को
खोजने के लिए शिलालेख जाकर नहीं पढ़ते, बल्कि पुस्तक में खोजते है, पिछले १० सालों
में तो इंटरनेट पर ही सारे संदर्भ खोजे जाते है, उसीप्रकार भविष्य में शायद ही कोई
किताब हाथ में लेकर पढ़ेगा, बल्कि सीधे इंटरनेट पर ही सारी पढाई और खोजबीन की जाएगी
और संदर्भ लिए जायेंगे. और फिर टीवी सीरियल और सिनेमा के संदर्भ प्रभावी मने
जायेंगे. इसलिए दृकमाध्यम की उपेक्षा करना मूखर्तापूर्ण है. इसे हमें ध्यान में लेना
जरुरी है.
ये
बातें ध्यान में लाकर देने पर भी बौद्ध लोग, नेता, संघटना, संस्थाएं, पक्ष चैन से
बैठे है. यही समज में नहीं आता. इस सिरिअल के आगामी एपिसोड में सुधारना कर यह सिरिअल
वैसे ही चालू रखना उतना ही घातक है. इस बात को नकारा नहीं जा सकता की बुद्ध के
जीवन के हर क्षण पर ब्राहमणों का प्रभाव होना दिखाया जायेगा. और उससे भी बढ़कर इस बात
को किसी भी हालत में माफ़ नहीं किया जा सकता की इस सीरियल में बुद्ध का जन्म 'पुत्र
कामेष्टि यज्ञ' से हुआ बताया
गया है. इसलिये यह सीरिअल बंद होना ही प्रायश्चित है.
यदि मोदी को बुद्ध पर सिरिअल प्रसारित करने का शौक है तो उसने
बाबासाहब द्वारा लिखी गयी 'बुद्धा एंड हिज धम्म' इस पुस्तक पर आधारित कथानक बनाकर
सिरियल को नए से शूटिंग/रिकॉर्डिंग कर बताना चाहिए.
भारत के बौद्धों को विदेशी बौद्धों से या विदेशी बौद्ध भिक्खुओं
से बौद्ध धर्म सिखने की आवश्यकता नहीं. क्योंकि बौद्ध धर्म भारत में निर्माण हुआ
है. उसे दुनिया में पंहुचाने के कार्य सम्राट अशोक ने किया है. और उसका सत्य
वैज्ञानिक स्वरुप बाबासाहेब ने विशद किया है. उसी प्रकार सिरियल एवं सिनेमा में
बुद्ध का चेहरा नहीं बताया जाए ऐसा भी बौद्ध विद्वानों का कहना है, क्योंकि बुद्ध
के चेहरे की महकारुनिकता, सम्यक सम्बुद्धता को साकार करना किसी को संभव नहीं.
इसलिए यह सीरियल बंद करने के लिए बौद्धों ने सर्वकस प्रयत्न करना आवश्यक है.
'पुत्र कामेष्टि यज्ञ' के कारण से ही मोदी, झी टीवी पर पुलिस केस दाखिल किये जाये.
लेकिन धार्मिक भावनाएं को चोट पहुचाई इस मुद्दे पर भी भारत में कहीं पर भी एफआईआर दाखिल नहीं की गई. हम षंढ हो गये है, यही कहना होगा.
दिनांक २० अक्टूबर २०१३ को मुंबई में झी टीवी के वर्ली, कार्यालय
पर निकाला गया मोर्चा कितना प्रभावी था या पहले से ही उसके 'बुद्धा सिरिअल बंद
पूरी तरह से होनी चाहिए' इस मांग के मूल उद्देश को विफल करने के लिए केवल मात्र एक दिखावा था, इसे खोजना होगा. मोदी यह बड़ा इंडस्ट्रीयालिस्ट
होने की वजह से लोग और संघटनाओ को खरीदना उसका पेशा रहा है. और इस मोर्चे की मूल
आयोजन संस्था 'ब्लिस' और मूल आयोजको को ही इस मोर्चे से पूरी तरह दूर कर दिया गया,
ताकि टीवी सिरिअल के लोगों के सामने मूल मांग ही न रखी जा सके और सिरिअल चलती रहे.
आरआरएस द्वारा बनायी गई 'शुद्र' पिक्चर के समय भी बाबासाहेब की "हु वेर द
शुद्रास?' किताब को समझाने के बाद भी इन संघटनाओं ने विरोध करना तो दूर इस पिक्चर
को समर्थन दिया था. बौद्ध लोगों को हिन्दू लोगों की तरह ही 'बाबासाहब', 'बुद्ध,
जयभीम शब्दों का प्रयोग कर गुमराह कर संघटनाओं में जोड़ा जाता है, और लोगों की ताकत
को सडाया जाता है. इसलिए सच्चे इमानदार कार्यकर्ताओं को नीतिवान संघटनाओ में भी सहभागी होना जरुरी है. यह क्रांति
प्रतिक्रांति समझने वाले बाबासाहेब के अनुयायियों को जानना चाहिए.
डॉ परम आनंद (८८०५४६०९९)
विहार सेवक, भारत लेणी संवर्धन समिती (ब्लिस)
